याद तेरी आई मैं, रोते-रोते सो गया|
आने का वादा किया था, वादे का क्या हो गया|
हमने सोचा था कि अब तो मंज़िल हमारी आ गयी|
जब आँख खुली तो देखा, रास्ता भी खो गया|
अब गिला किसका करे, जब हो गयी हमसे खता|
जो हमारा ना हुआ क्यों, दिल उसी का हो गया|
और क्या बताउ, हाल कल की रात का|
हो गयी थी सुर्ख आँखे, तकिया गीला हो गया||||||
Rgds,
Rajender Chauhan
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Tuesday, December 1, 2009
Thursday, November 5, 2009
बेवफा
अपने हर वादे को, भूल जाते रहे|
यू ही हर रात हमको, जगाते रहे||
हमने सोचा उन्हे भूल जाए मगर|
याद उतना ही वो, और आते रहे||
कई ज़माने तो यू ही, गुजरते रहे|
कल वो आएगे हम ये, मानते रहे||
एक सैलाब सा, अश्को का बन गया|
आप इतना हमे क्यू, रुलाते रहे||
श्रीमान:- वेदप्रकाश गुप्ता की क़लम द्वारा रचित!!!!
Rgds,
Rajender Chauhan
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यू ही हर रात हमको, जगाते रहे||
हमने सोचा उन्हे भूल जाए मगर|
याद उतना ही वो, और आते रहे||
कई ज़माने तो यू ही, गुजरते रहे|
कल वो आएगे हम ये, मानते रहे||
एक सैलाब सा, अश्को का बन गया|
आप इतना हमे क्यू, रुलाते रहे||
श्रीमान:- वेदप्रकाश गुप्ता की क़लम द्वारा रचित!!!!
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