Wednesday, February 10, 2016

कोई दीवाना कहता है,कोई पागल समझता है (On the Birthday of Dr. Kumar Vishwas)



कोई दीवाना कहता है,कोई पागल समझता है,
मगर धरती कि  बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझ से दूर कैसे हूँ, तू मुझसे दूर कैसे है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है.

मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों मैं आसूं है
जो तू समझे  तो मोती है ना समझे तो पानी है

समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन तो नहीं सकता
ये आंसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले,
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता 

हमारे दिल मैं कोई ख़्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किस्से को हकीकत मैं बदल बैठा तो हंगामा 

Thursday, December 1, 2011

शायद ज़िंदगी बदल रही है!!

शायद ज़िंदगी बदल रही है!!

जब मैं छोटा था, शायद दुनिया

बहुत बड़ी हुआ करती थी..
मुझे याद है मेरे घर से "स्कूल" तक
का वो रास्ता, क्या क्या नहीं था वहां,
चाट के ठेले, जलेबी की दुकान, बर्फ के गोले, सब कुछ,
अब वहां "मोबाइल शॉप", "विडियो पार्लर" हैं,
फिर भी सब सूना है..
शायद अब दुनिया सिमट रही है...
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जब मैं छोटा था,
शायद शामें बहुत लम्बी हुआ करती थीं...
मैं हाथ में पतंग की डोर पकड़े,
घंटों उड़ा करता था, वो लम्बी "साइकिल रेस",
वो बचपन के खेल, वो हर शाम थक के चूर हो जाना,
अब शाम नहीं होती, दिन ढलता है और सीधे रात हो जाती है.
शायद वक्त सिमट रहा है..
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जब मैं छोटा था,
शायद दोस्ती बहुत गहरी हुआ करती थी,
दिन भर वो हुजूम बनाकर खेलना, वो दोस्तों के घर का खाना,
वो साथ रोना...
अब भी मेरे कई दोस्त हैं,पर दोस्ती जाने कहाँ है,
जब भी "traffic signal" पे मिलते हैं, "Hi" हो जाती है,
और अपने अपने रास्ते चल देते हैं,
होली, दीवाली, जन्मदिन, नए साल पर बस SMS आ जाते हैं,
शायद अब रिश्ते बदल रहें हैं..
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जब मैं छोटा था,
तब खेल भी अजीब हुआ करते थे,
छुपन छुपाई, लंगडी टांग,पोषम पा, कट केक, टिप्पी टीपी टाप.
अब internet, office, से फुर्सत ही नहीं मिलती..
शायद ज़िन्दगी बदल रही है.

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जिंदगी का सबसे बड़ा सच यही है..
जो अक्सर कबरिस्तान के बाहर बोर्ड पर लिखा होता है...
"मंजिल तो यही थी, बस जिंदगी गुज़र गयी मेरी यहाँ आते आते"

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.ज़िंदगी का लम्हा बहुत छोटा सा है...
कल की कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल सिर्फ सपने में ही है..
अब बच गए इस पल में..तमन्नाओं से भरी इस जिंदगी में
हम सिर्फ भाग रहे हैं.. कुछ रफ़्तार धीमी करो, मेरे दोस्त,
और इस ज़िंदगी को जियो...खूब जियो मेरे दोस्त,


Monday, November 21, 2011

तुम आते तब क्या होता!!!!

मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता?
मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर,
अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर
और दिशाओं से प्रतिध्वनियाँ, जाग्रत सुधियों-सी आती हैं,
कान तुम्हारे तान कहीं से यदि सुन पाते, तब क्या होता?


तुमने कब दी बात रात के सूने में तुम आने वाले,
पर ऐसे ही वक्त प्राण मन, मेरे हो उठते मतवाले,
साँसें घूमघूम फिरफिर से, असमंजस के क्षण गिनती हैं,
मिलने की घड़ियाँ तुम निश्चित, यदि कर जाते तब क्या होता?


उत्सुकता की अकुलाहट में, मैंने पलक पाँवड़े डाले,
अम्बर तो मशहूर कि सब दिन, रहता अपने होश सम्हाले,
तारों की महफिल ने अपनी आँख बिछा दी किस आशा से,
मेरे मौन कुटी को आते तुम दिख जाते तब क्या होता?


बैठ कल्पना करता हूँ, पगचाप तुम्हारी मग से आती,
रगरग में चेतनता घुलकर, आँसू के कणसी झर जाती,
नमक डलीसा गल अपनापन, सागर में घुलमिलसा जाता,
अपनी बाँहों में भरकर प्रिय, कण्ठ लगाते तब क्या होता?

Thursday, November 10, 2011

Ghazal by Bhupender & Mittali!!!!

राहों पे नज़र रखना, होटो पे दुआ रखना,

आ जाए कोई शायद,दरवाज़ा खुला रखना,


एहसास की शमा को, इस तरह जला रखना,
अपनी भी खबर रखना,उस का भी पता रखना,
रातों को भटकने की,देता है सज़ा मुझ को,
दुश्वार हे पहलू मे, दिल तेरे बिना रखना,

लोगों की निगाहों को,परख लेने की आदत है,
हालात की तहरीरे, चेहरे से बचा रखना,
गम उस की अमानत है,पलकों पे सज़ा रखना,
आ जाए कोई शायद,दरवाज़ा खुला रखना


तन्हाई के मौसम मैं, सायो की हुक़ूमत है,
यादो के उजालो को सीने से लगा रखना,
इस तरह खुशी अब से दिल की सदा रखना
वो भी ना बुरा माने, दिल का भी कहा रखना!!!
आ जाए कोई शायद,दरवाज़ा खुला रखना!!!


Ghazal by Bhupender & Mittali!!!!

Friday, October 7, 2011

तेरे चले जाने के बाद!!

टीसता है ज़ख़्म अक्सर खून रुक जाने के बाद,

कितने घायल हो गये लोग मुस्कुराने के बाद!!
 
ज़िंदगी उनको कहाँ मुश्किल लगी थी इस कदर,
जो परेशान हो गये इंसान कहलाने के बाद,

यू तो पहले भी सभी नादान कहते थे हमको,
और ज़्यादा हो गये कुछ तेरे समझने के बाद.

बस इसी डर से नही तय कर सके हम फ़ासले,
बढ़ ना जाए दूरियाँ, ज़्यादा करीब आने के बाद,

आई है बेनसिबिया मुझमे कुछ इस तरह,
तूफान मैं है किश्ती मेरी साहिल से दूर जाने के बाद.

मंज़िल तक साथ जाए वो हम-राह नही है अब,
गिरने से पहले कौन थामेगा, तेरे चले जाने के बाद.

बन कर रह-नुमा दे गयी दगा,
बन कर वीरना रह गया मैं,तेरे चले जाने के बाद.
उजाले तेरी यादो के हमारे पास है लेकिन,
लगता नही दिल गुलशन मैं, तेरे चले जाने के बाद!!!

Monday, September 5, 2011

आरज़ू

अपनी आँखो मे मोहबत के चिराग जलाए रखना,
गम के काँटों मे उमीद के गुल सजाए रखना,

गुजर जाएगा ये वक़्त भी, दिल मैं,
होसला और सब्र बनाए रखना,

मेरा वजूद तुझ से जुदा है कहाँ,
जब भी पाना चाहो मुझे, आईना रु-ब-रु रखना,

ज़िंदा रहना भी एक इबादत है,
ज़िंदा रहने की आरज़ू रखना!!!




Monday, March 28, 2011

F.R.I.E.N.D.S

खुशी भी दोस्तो से है, गम भी दोस्तो से है,
तकरार भी दोस्तो से है, प्यार भी दोस्तो से है,

रुठना भी दोस्तो से है, मनाना भी दोस्तो से है,
बात भी दोस्तो से है, मिसाल भी दोस्तो से है,

नशा भी दोस्तो से है, शाम भी दोस्तो से है,

जिन्दगी की शुरुआत भी दोस्तो से है, जिन्दगी मे मुलाकात भी दोस्तो से है,
मौहब्बत भी दोस्तो से है, इनायत भी दोस्तो से है,
काम भी दोस्तो से है, नाम भी दोस्तो से है, ख्याल भी दोस्तो से है,

अरमान भी दोस्तो से है, ख्वाब भी दोस्तो से है,
माहौल भी दोस्तो से है, यादे भी दोस्तो से है,

मुलाकाते भी दोस्तो से है, सपने भी दोस्तो से है,
 अपने भी दोस्तो से है, या यूं कहो यारो, अपनी तो दुनिया ही दोस्तो से है.

Wednesday, November 17, 2010

वक़्त-ए-सफ़र

वक़्त-ए-सफ़र करीब है, बिस्तर समेट लू,
बिखरा हुआ हयात का मंज़र समेट लू,

फिर ना जाने हम मिले ना मिले, ज़रा रूको
मैं दिल के आईने मे ये मंज़र समेट लू,

गैरो ने जो सुलूक किया उनका क्या गिला,
फेके है दोस्तो ने जो पत्थर समेट लू,

कल जाने कैसे होंगे कहाँ होंगे घर के लोग,
आँखों मे एक बार भरा घर समेट लू,

भड़क रही है ज़माने मे जितनी आग,
जी चाहता है सीने के अंदर समेट लू!!!

Thursday, November 4, 2010

Happy Diwali to All

कुछ नन्हे दीपक लड़ते है, अमावस के गहन अन्धेरे मैं,
कुछ किरणने लोहा लेती है, तन के एक अन्हद घेरे से,
काले अम्बरमे होती है आशाओ की आतिशबाज़ी,
उत्सव मे परिणीत होती है हर सन्नाटे की लफ़ाज़ी
उजियारे के मस्तक पर जब सिंदूरी लाली होती है,
उस घड़ी ज़माना कहता है, बस यही दीवाली होती है.

घर की लक्ष्मी एक थाली मे, उजियारा लेकर चलती है,
हर कोने, दहेरी,चोख्त को एक दीपक देकर चलती है,
दीवारे नये वसान धारे, तोरण पर बंधनवर सजे,
आँगन मे रंगोली उभरे और सरस डाल से द्वार सजे,
कची पाली के ज़िम्मे, आँखो की रखवाली होती है,
उस घड़ी ज़माना कहता है बस यही दीवाली होती है.......

आप को और आप के परिवार को दीवाली की हार्दिक शुभकामनाए

Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Tuesday, August 10, 2010

बदलता परिवेश!

गोवंश के खूटे खाली, ट्रक्टर खड़ा दुआरे पे,
बूढ़ी काकी पड़ी कराहे, टूटी खाट उसारे पे!
कैसा ये परिवेश है बदला, नही बोलते भोर मैं काग़ा,
पैसा ही भगवान बन गया, फिरता आदमी भागा-भागा!

सौदागर हर मन मैं बैठा लोक लाज गंगा मैं डूबा,
धन-बल,जन-बल पास है जिसको पूरा करता हर मंसूबा

बोझ हो गये रिश्ते नाते, सुने सब त्योहार,
बहुए-बेटे टेंट निहारे, मतलब का त्योहार,
अच्छाई उपहास बन गयी हर आँगन के हिस्से!
रामायण,गीता टी.वी पर, घर-घर लैला-मजनू के किस्से

बचपन अब लाचार हो गया, क्या दाव लगाये जवानी के मतवारे पे,
बूढ़ा नीम का पेड़ कट गया, शान था कभी दुआरे पे,
बूढ़ी काकी पड़ी कराहे, टूटी खाट उसारे पे!

Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Monday, July 12, 2010

देश मे डेवेलपमेंट

देश मे डेवेलपमेंट हो रहा है!!
अमीरो का काम अर्जेंट हो रहा है!!
ग़रीब बेचारा साइलेंट हो रहा है!!
देश को बेचने का अग्रिमेंट हो रहा है!!!!

चमचा अपनी जगह परमानेंट हो रहा है!!
ईमानदार बेचारा सस्पेंड हो रहा है!!
कार्यालय भी रॉस्टूरेंट हो रहा है!!

बच्चा बाप से इंटेलिजेंट हो रहा है!
घर-घर मे पार्लियामेंट हो रहा है!!

रिशवत से काम हेंड-टू-हेंड हो रहा है
नेता सभा समाप्त कर प्रेज़ेंट हो रहा है!!
देखो हमारे देश मे डेवेलपमेंट हो रहा है!!!


Rgds,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Friday, June 4, 2010

तेरी याद

दुल्हनो के माथे पर लगी बिंदिया अच्छी लगी,
फूलो पर बैठी हुई, तितलिया अच्छी लगी,
जब से हम गिनने लगे, इन पर तेरे आने के दिन,
बस उसी पल से हमे ये उंगलियाँ अच्छी लगी!!!!!!

Thursday, May 13, 2010

A Night!!!

The Sun descending in the West,
The Evening Star does Shine;

The Birds are silent in the nest,
and I must seek for mine....

The Moon like a bower,
in heaven's high tower,
with silent delight,
sits and smile on the Night!!!!!


Poem by William Blake..

Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Saturday, May 1, 2010

ज़िंदगी का सफ़र

ये सफ़र ज़िंदगी का यू तय कर लिया जाए,
उठाकर कोई खत पुराना पढ़ लिया जाए!!

यू तो उम्र भर मुस्कुराते रहे हम,
दरिया अश्को का आँखो मैं भर लिया!!

याद मुझे हर वक़्त तेरी ही आई,
जब कभी मैं उधर निगाह उठाई!!

ख़ौफ़ मुझे मौत का ज़रा सा भी नही,
ज़िंदगी मैं ये "राज" कई दफ़ा मर लिया!!!!


Regards,
राजेंद्र चौहान
http://rajenderblog.blogspot.com

Thursday, April 1, 2010

जिस्म

एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो,
तेरी चांदनी में नहाऊं मैं और हर तरफ बस अंधेरा हो,
एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो!

तेरे मखमली बदन में,खुशबुऒं के चमन में,
सदियों तक वो रात चले,सदियों दूर सवेरा हो
एक चादर में लिपटे दो बदन , एक तेरा हो एक मेरा हो!

तेरे होठों को सिल दूं मैं अपने होठों के धागे से
एक सन्नाटे में खामोशी से, तेरी बाहों ने मुझको घेरा हो
एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो!

दोनों लिपटें एक दूजे से, गांठ सी लग जाए बदनों में
मेरे जिस्म में घर मिल जाए तुझे, तेरे जिस्म में मेरा बसेरा हो
एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो!

आज मन कहता है कि कुछ ऐसा हो, तू बन जाए मैं , मैं बन जाऊं तू
बिस्तर पे तेरे मेरे सिवा,सिर्फ ज़ुनून और खामोशी का डेरा हो
एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो!!!


Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Tuesday, March 16, 2010

एक कहानी हूँ मैं

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,

रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....

सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,

कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...

इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,

जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,

आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,,

"अगर रख सको तो निशानी, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं

Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Friday, March 5, 2010

दोस्ती

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,
सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,
सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,
दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती ,
रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,
मझधार में किनारा है दोस्ती,
जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की, वरना इस जमीं पर "खुदा" है दोस्ती.....

Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Saturday, February 20, 2010

हम यू जीते है

हम यू जीते है, जीना भी खता हो जैसे,
ज़िंदगी सिर्फ़ गुनाहो की सज़ा हो जैसे!

मेरी खुशियाँ छीन कर हवा ले गयी मस्तानी,
जीवन की इस्थीर मंज़िल पर सिर्फ़ उदासी छोड़ गयी है!!

चाहा था फूलो का सौरभ पर काटो ने उलझाया है,
कलियाँ मेरे उपवन का रिश्ता पतझड़ से जोड़ गयी है!!

तेरी यादो से जो दूर रहू क्या बचेगा मेरे जीवन मैं,
मेरी हर साँस तुझ से जिंदा है, वरना क्या है मेरी धड़कन मैं!!!!


Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Friday, January 8, 2010

वीरानिया

दोपहरी मैं जब रेत तपती है, धूप चटकती है !
आके जुबा पे बात रुकती है, आवाज़ भटकती है!

लाश बनकर भी जीना पड़ता है इंसानो को!
जब तक मौत नही आती सांस खटकती है!

जिंदगी के रेगिस्तान मे, न हो प्यार की बारिश अगर,
मौसम की बारिश जब बरसती है, आँख बरसती है!!

कुछ लोगो को तो जीना भी रास नही आता!
घर नही होता, जेब नही होती,भूख तो लगती है मरते दम तक!
जब नही होती एक तमन्ना पूरी,कयामत तक कहाँ-कहाँ, कोई रूह भटकती है!
किनारे पर आकर, जब डूब जाती है किस्ती,एक शक्श के बिना ये दुनिया वीरान सी लगती है!!

Another tribute to my mother!!


Regards,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com

Sunday, December 27, 2009

ज़िंदगी एक उड़ती हुई चिड़िया का नाम है||||

ज़िंदगी एक उड़ती हुई चिड़िया का नाम है||||

पल दो पल ज़िंदगी मज़ा उठाने का नाम है|
जवानी के जोश मे आगे बढ़ते चले जाओ |
गम मे डूबकर जवानी को गमगीन ना बनाओ|
इन्सानो मे भेदभाव लिए बीच मे आती झूठी शान है|
ज़िंदगी एक उड़ती हुई चिड़िया का नाम है||||

थका हुआ पंछी ढूढ़ता है आरामगाह जिस तरह|
ढलती उम्र जीवन का सहारा ढूढ़ती है उसी तरह|
उम्र ढल जाने पर ज़िंदगी को धोखा देकर निकल जाते प्राण है||||
ज़िंदगी एक उड़ती हुई चिड़िया का नाम है||||


A Tribute to my sweet Mother, for her loveable & unforgettable memories.

Rgds,
Rajender Chauhan
http://rajenderblog.blogspot.com